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जल को जीवन क्यो कहां जाता है

जल को जीवन क्यो कहां जाता है


क्या आपको यह पता है कि हमारी सभ्यता का जन्म नदी के निनारे पर हुआ था और जो हमारी मनुष्य पर्जती की सबसे अच्छी और अनोखी बात है वो है हमारा दिमाग हम अपने दिमाग से पता नहीं क्या क्या नया सोच कर बना सकते है क्या आपको याद है कि आपके बचपन में वो कोनसा खेल था जो आपको सबसे ज्यादा पसन्द था कब्बदी,कंचे,गिल्ली डंडा,केराम इत्यादि बहुत से खेल थे जो हम खेला करते थे ऐसे ही हम अपने बचपन में पानी के साथ भी बहुत खेला करते थे हम अपने कपड़ों की चिंता किए बिना ही हम पानी में खेलने लगते थे क्युकी हमारे पूर्वज किसान थे और हमें भी कीचड़ में खेलना बहुत पसंद था जब भी बारिश होती थी हम बारिश में नहने चले जाते थे और जब तक बारिश खत्म होती जब तक नहते और फिर अपने दोस्तो के साथ कीचड़ में खेलने लगते थे लेकिन जैसा आज कल देखा जा रहा है उस हिसाब से हमारी आने वाले पीढ़ी इसी पानी के लिए तर्सेंगी जिस पानी में हम खुसी खुशी खेला करते थे आपको यकीन नहीं होगा कि महाराष्ट्र के लातूर जिले में पानी कि कमी के कारण चल रहे टकराव को रोकने के लिए वहा पर धारा 144 लगाई गई थी इस धारा का यहां कहना था कि पानी के स्रोत के आस पास लोग समूह बना कर खड़े नहीं हो सकते थे और अगर ऐसा ही चलता रहा तो थोड़े ही समय बाद वो जगह जहां हम मस्ती से खेला करते थे वो लड़ाई का मैदान बन जाएगी क्युकी यह देखा जा रहा है कि हम ही पानी को खतम करने में लगे है एक बात सोचने वाली है अगर कोई हमारे पूर्वजों से कहता कि पानी को खरीद कर पीना पड़ेगा तो वहा उसे पागल बताते पर आज देखो हमें पानी को खरीद कर भी पीना पड़ता है हम अपनी नदियों को भी बोहोत नुकसान पहुचा रहे है क्युकी पानी को नदियों तक सीचने का काम पेड़ पोधो का है यह अपनी जड़ों से पानी को सिचते है पर हमरे लगातार पेड़ काटने के कारण वो पानी को सिच नहीं पाते और फिर पानी समुन्दर में जाके मिल जाता है जो कि हमारे किसी काम का नहीं बचता इसी कारण हमारी गोदावरी नदी का जल स्रोत सुख चुका है और दूसरी तरफ किसान नदी भी 40% उजाड़ हो चुकी है और अब गंगा नदी भी जितने समय तक 12 मसी रहेगी ये भी पता नहीं है और कावेरी नदी के बारे के तो सब जानते ही है वर्ष 1989 में सिर्फ 22 नदिया प्रदूषित थी पर अब ये अकड़ा बड़ कर 302 हो चुका है और इसमें भी झील और तालाब समिल नहीं है जब हमारा भारत देख आजाद हुआ था तो हमारे पास प्रतिएक व्यती के लिए 100 लीटर पानी मोजूद था लेकिन ये अकड़ा घट कर 30 लीटर हो चुका है इतना ही नहीं पानी कि कमी के कारण लगभग 83 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है क्या अब हम ये कहना पड़ेगा कि ऐसा ही अगर चलता रहा तो हमारे गरीब किसानों का 84व नंबर हो सकता है क्युकी पानी के कारण हमरे किसान आए दिन आत्महत्या करने के लिए मजबुर हो रहे है और कितने तो कर भी रहे है आए दिन अखबारों में खबर आती है कि किसान ने पानी की कमी के कारण कि आत्महत्या सयाद आप को यह मालूम नहीं है कि अभी तक 2 लाख किसानों ने आत्महत्या कि है लेकिन हम यहां सोच कर रहे जाने है कि हमें क्या हमें अपने घरों की बाकी जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए लेकिन आप को यह नहीं पता है की पानी की कमी के कारण हमें भी परेशानी उठानी पड़ती है क्युकी जब किसान को पानी नहीं पहुंचता है तो वो सही से खेती नहीं कर पाता है और फिर हमें वहीं चीजे बाहर के देशो से खरीदनी पड़ती है जो कि हमें फिर महंगे दामों पर मिलती है यू एन एस एफ कि रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2040 तक लगभग 60 करोड़ बच्चों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ेगा और हमें अपने उद्योगो को चालाने के लिए 30% पानी अधिक चाहिए होगा और फिर बिजली बनाए के लिए भी पानी चाहिए होगा ओर हमारे पास इतना पानी नहीं होगा अगर हमारा की तरह हमने अभी इन अकड़ो पर ध्यान नहीं दिया तो पानी की समस्या हमारी सबसे बड़ी समस्या होगी ओर शायद आने वाले समय में बड़े बड़े विश्व युद्ध सिर्फ अनी के लिए होने लगेंगे अगर हमने आज इसके लिए कुछ नहीं किया तो हमारे आने वाली पीढ़ियों को बहुत ही परेशानियों को सामना करना पड़ेगा।

हमें ऐसा क्या करना चाहिए जो हम इस समस्या से बच सके तो इसका एक तरीका यह भी है कि हमें पेड़ लगाना चाहिए बड़ी बड़ी नदियों के किनारो के 1 किलोमीटर के दायरे में हमें पड़ लगाने चाहिए और छोटी नदियों के आधे किलोमीटर के दायरे में पर ऐसा करने है हाक सिर्फ सरकार का है हो हमें सरकार है यह काम करने के लिए कहना होगा और हमें खुद भी इस बात पर ध्यान देना होगा कि हम खुद भी पानी का इस्तेमाल बड़ी ही ध्यान से करे जितने का काम हो उतना ही ले जाता बर्बाद ना करें और हमें अपने आस पास भी पेड़ लगाने चाहिए अगर हम सब मिलकर यह जिम्मा अपने सर पर लेले तो शायद हमारी आने वाली पीढ़ी को पानी की कमी ना उठानी पड़े तो हमे सब काम के लिए दूसरों को नहीं कहना है क्युकी ये हमारी भी जरूरत है और ये सबकी जरूरत है।

धन्यवाद

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