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कहानी का नाम .. रघु

एक लड़का था जिसका  नाम  रघु था.वो अपनी माँ के साथ रहता था .वो और उसकी माँ मजदूरी  का काम करते थे,
उसके पिता मजदूरी करते वक्त अचानक ईठ के ढेर में दबकर मर जाते है .उसकी माँ पे तो समझो आसमान ही टुट गया था,जिसने कभी बाहर कुछ काम नहीं किया था ,उसके पिता के बाद उसको ही करना पड्ता था,उसकी माँ चाहती थी कि उसका बेटा बोहोत पड़े -  लिखे पर उसका बेटा कहता था, 
        माँ मजदुरी करके  तुझको  और मुझको इतना पैसा ही मिलता है की हम दो वक्त  का  खाना खाले  तो में स्कुल केसे जा प​ऊगा ,मुझे स्कुल नहीं जाना तेरे साथ ही काम करवाना  है ,दोनों की जिंदगी उनके अनुसार अराम से चल रही थी,दोनों शुबह काम पर जाते शाम को आते खाना बनाते और साथ में मिलकर खाते और सो जाते इसी तरह उनका जीवन चल रहा था .
             वो लड़का देखता है की  जहां वो काम करता है उसके सामने ही बड़ी सी बिल्डींग है ,जहाँ बोहोत बड़े -बड़े लोग रहते है ,सब के पास  कार है ,
         
वो देखता है की उस बिल्डींग में रहने वाली महिलाये कीतनि सुन्दर कपड़े और साडी पहनती है ,उसका मन भी करता था कि काश में  एक प्यारि सी सुन्दर सी साडी अपनी माँ के लिए ले सकु पर उसके पास इतने पेसे नहीं थे,एक दीन देखता है एक महीला बिल्डींग से अपनी कार  में बेठकर कही जा रही है ,रघु उस ओरत को देखता है और अपनी माँ से कहता है माँ में अभी आया और उस कार के पिछे भागने लगता है और चिल्लाता है आन्टि रुक जाओ, आन्टि रुक जाओ. जब उसका ड्राइवर का्च से देखता है ,तो कह्ता है मेडम एक लड़का कार का पिछा कर रहा है ,वो महीला कहती है कार रोको और वो कार रोक देता है महिला कार से उतरति और देखती है वो लड़का भरि दोपहर में नन्गे पेर पसिने से लथपथ कार का पिछा कर रहा है ,उसने   उस लड्के से पुछा तुम मेरी गाडी का पिछा क्यु कर रहे हो कही कोई चोर लुटेरे तो नहीं हो ड्राइवर  पुलिस को बुलाओ  ,वो हाफ्ते हुए कह्ता नहीं -नहीं मेडम जी में कोई चोर लुटेरा नही हूँ ,में तो बस एक मजदुर हूँ .आप के घर की बिलडिंग के सामने ही मजदूरी का काम करता हूँ ,तो वो महिला वोलि वो तो ठीक है पर तुम मेरा पिछा क्यु कर रहे हो ,
         वो कह्ता है में तो बस यह पुछ्ने के लिए आप का पिछा कर रहा था की ये साडी जो आपने पहनी है वो कहा से ली है ,और कितने में ली  है ,वो महीला हसने लग जाती है ,और कहति  है ,पागल हो क्या ईतनी सी बात के लिए तुम इतनी देर से मेरा पिछा कर रहे हो ,और में तुम्हे ए क्यु बताउ वो कह्ता है में मेरी माँ के लिए एक ऐसी ही साडी खरीदना चह्ता  हूँ ,वो कहती है ठीक है पर तुम्हे शायद काफ़ी समय लगे उसके बाद भी तुम ए साडी नहीं खरीद पाओगे ,वो कह्ता है नहीं - नहीं आप तो बताओ ए कितने की है वो कहतीहै १० हजार की है उसके पेर के नीचे से जेसे जमिन ही खिसक गई वो सोचता है हमारे पास दो वक्त का खाना नहीं रहता और ए १० हजार की साडी पहनकर घूमती है ,
              वो कहती है अब में जा रही हूँ मैने तो कहा ही था की तुम इसे नहीं खरीद पाओगे और उसे उस लड्के के आसु से भरे आँख और पसिने से लथपथ लड्के पर बोहोत तरस आता है ,तो उसे कुछ पेसे निकाल कर देने लगती  है ,वो कह्ता है मेडम जी में भीख नहीं लेता तो वो कहती ठीक है पानी तो पी सकते हो और उसे पानी दे देती है .ओर फिर वो वापस  चला  जाता है ,
वो महिला जब भी वहाँ से अपनी गाडी  से नीकलती तो रघु को उसकी माँ के सात अक्सर काम करते देखती थी ,एक दीन उसने अपने ड्राईवर से कह कर उस लड्के को अपने घर बुलाया और पुछा तुम क्या- क्या कर सकते हो ऊसने कहाँ आप को क्या काम करवाना है उसने कहाँ घर का काम कर सकते हो और गाडि साफ़ कर सकते हो अगर तुम ए सब काम करोगे तो में तुम्हे १,हज़ार रुपये हर महिने दूँगी रघु तो जैसे पागल ही हो गया उसने कहाँ में कर लूंगा इस तरह वो वहां काम करने लगता है इस तरह एक दीन वो महिला ने अपनी साडी प्रेश  करने के लिए भिजवाया तो वो साडी प्रेश करने वाले से गलती से जरा सी जल  जाती है उसने जैसे तेसे सही करके देता है लेकिन जब वो देखती है तो उसको बोहोत गुस्सा आता है लेकिन अब वो कर भी क्या सकती थी ,तब उसने ए साडी रघु को देने की सोचि और रघु को बुलाया और कहा रघु ए साडी तुम रख लो उसने कहा नहीं मेडम जी मेरे पास इसे खरिद्ने के लिए पेसे अभी नहीं है उसने कहाँ रघु मुझे तुमसे कोई पेसे नहीं चाहिए इस  साडी के मुझे तूम से कोई पेसे नहीं चाहिए  तुम मेरे यहां काम तो करते हो ,तो वो कह्ता है तो क्या आप इसकी किमत मेरी पेमेन्ट से कटोगी उसने कहा नहीं में तुम्हे ए साडी अपनी खुशी से दे रही हूँ,
            वो साडी लेकर चिल्लाते हुए अपने घर की तरफ़ भागता है कहता है माँ  देख में तेरे लिए क्या लेकर आया हूँ ,लेकिन जब वो अपने घर के पास बोहोत भीड़ देखता है तो पुछ्ता है ए क्या हो रहा है मेरे घर में तब वहा की झुगि की एक ओरत कहती है की तेरी माँ कमजोरी ओर भुखे रहने ओर काफ़ी समय से बीमार रहने की बजह से मर गयि वो वही पर वो साडी गिराता है ओर कस कस के रोने लगता है माँ उठ में तेरे लिए साडि लेकर आया हु में तुझे फटी साडी नहीं पेह्न्ने  दुंगा  उठ माँ लेकिन उसकी माँ नहीं उठ्ति तभी वो देखता है की वो मेडम जी आई है तो वो दोड्कर जाता है और लिपट कर रोने लगता है और कह्ता है मेडम जी मेरी माँ मर गयी अब कोन ए साडी पेहनेगा वो किसी से कहकर वो साडी उसकी माँ को पेह्ननाने के लिए कहती है ,,
                और कुछ दिन वाद रघु को लेकर अपने घर चली जाती है ,और उसकी माँ की इच्छा अनुसार रघु का स्कूल में एडमीशन करा देती है 
और कहती है रघु तुम पड लीख कर अपनी माँ का सपना पूरा  करो और वो अपनी माँ का सप ना  पूरा करने में लग जाता  है ,मेडम जी ने उस्से वो सब दिया जो उसे चाहिए था ...
 वो सोचता है जब माँ थी तब मुझे ए सब चाहिए था ...लेकिन तब वो ए खुशी नहीं दे पाया अपनी माँ को  लेकिन वो कसम खाता है की वो पड्लिख कर जरूर कुछ बनेगा और अपनी माँ का सपना जरुर पुरा करेगा,,लेकिन वो अपनी माँ कभी नहीं  को नहीं भूल पाया है .......
                                              *************
                                                       समाप्त
                                                *************
     
ईन्सान का जीवन भी केसा होता है जब हम जो चाहे वो हमें  तब नहीं मिलता और अगर मिल जाए तो हमारा जीवन तो समझो स्वर्ग बन जाए ...लेकिन जब जरुरत ना हो तब वो चीज़ अगर हमें मिले तो उसका  उतना मह्तव नहीं रह्ता....

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