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शिक्षित होने के बाद भी क्यों है हम बेरोजगार ?

हमारे देश में शित बेरोज़गार की समस्या एक गंभीर  रुप ले रही है ,अशिक्षीत  बेरोजगार के साथ आज हमारे देश में शिक्षीत  बेरोज़गार भी गंभीर समस्या  है ,

आज हमारे देश में लगभग 14.30 करोड़  युवा बेरोजगारी  की समस्या से जूझ  रहे है और ये कम होने की बजह दिन ब दिन बड़ती हीं जा रही है ,
हमारे देश के अलावा  कोई भी विकाशशील देश हो उन सभी देशो  में शिक्षीत बेरोजगार के समस्या विधमान  है और उसे खत्म करने के जिम्मेदारी भी हमारे उप्पर ही है इसका अंत करने के लिए बोहोत जरुरी कुछ बदलाव  करने के साथ कुछ महत्वपूर्ण  कदम  उठाना  है ,
शिक्षित बेरोज़गारी के समस्या के कई कारण हो सकते है उनमे से कुछ इस प्रकार  है ,
(1)बड़ती जनसंख्या 
(2) शिक्षा व्यवस्ता  
(3),लघु  उधोगो  का नष्ट होना 
(4)मशीनीकरण  का प्रयोग  
(5)मौसम का असर 

इसके आलावा  और भी कारण है शीक्षीत    बेरोज़गारी के और इन सब से निपटना  भी हमारे उप्पर ही है की हम कैसे इसका समाधान  करे परन्तु कारण इतने जटिल  है की इसका समाधान भी ढूढ़ना  बोहोत  कठिन  होता जा रहा है ,
सबसे पहले इनके कारण को विस्तार  से अवलोकन  करते है ,

(1) बड़ती जनसंख्या :- 
बड़ती जनसंख्या के निरंतर  वृद्धि से इसका असर  शिक्षा पर भी पड़ता है  आप सोचेंगे  कैसे तो शिक्षा ही एक कारण हो सकता है 
  शिक्षीत युवा  के लिये  शिक्षीत होते हुए भी युवा वर्ग  बेरोजगार की समसया से जुझ रहा है उच्च शिक्षा होने पर भी जनसंख्या  वृद्धि  की वजह से  शिक्षा भी अभिशाप  लगती है जहाँ एक पद होता है वहाँ लाखो युवा अपने भविष्य को आजमाने  के लिए आवेदन करते है और रोजगार मिलता किसे है वो भी किसी एक को और वो लाखों युवा बेरोजगार की केटेगरी में फिर आ जाता है जिस्से युवा वर्ग रोजगार मे उम्र की मार भी झेलता  है इसलिए सबसे पहले हमें जनसख्याँ वृद्धि पर रोक लगानी होंगीं,

(2)शिक्षा व्यवस्था :- 
दूसरा कारण शिक्षित बेरोजगार के किये शिक्षा व्यवस्था   हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था प्रायोगिक ना होते हुए एक ही प्रकार की सैंद्धांतिक नीति चली आ रही है बस वही रटा रटाया  पाठ पड़ाया जाता है और प्रायोगिक का कम ही प्रयोग होता है जिस्से युवा में प्रायोगिक सोच उत्त्पन्न नहीं होती और कारण वहीं होता है एक के बाद एक युवा रोज़गार की दौड़ में लग जाता है ,हमारे देश में अगर शिक्षा की नीति बदली  जाए तो शायद बोजगारी में काफी हद  तक कमी कर सकते है ,

(3)लघु उधोगों का नष्ट होना :-
तीसरा महत्वपूर्ण  कारण लघु उधोगों का नष्ट होना है ,पहले हमारे देश में बोहोत से लघु उधोग होते थे जिस्से कई युवा को रोजगार मिल जाता था परन्तु अब उसकी जगह बड़े-  बड़े उधोगों ने ले लिया है जिस्से छोटे लघु उधोगो का तो जैसे अंत ही हो गया है इसी  के चलते युवा बेी मार सह रहे है ,

(4) मशीनीकरण् का प्रयोग
चौथा महत्वपूर्ण कारण मशीनीकरण् का प्रयोग है जिसके चलते  युवा बेरोज़गारी को झेल  रहा है जहा हजारो इंसानो के हाथो से उधोगो में कार्य  होता था वही आज मशीनों  का प्रयोग  होने लगा है इसे हम क्या कहेँगे तरक्की  या बेरोजगारी माना मशीनीकरण्  और टेक्नीकल की बजह से देश में नवीनीकरण उतपन्न  हुआ है पर इसकी  बजह से युवा वर्ग बेरोजगारी को झेलने  के लिए मजबूर हो गया है ,

(5) मौसम का असर :-
आप सोचेंगे की मौसम का असर का संबंध बेरोजगारी से कैसे हो सकता है ,तो में बताती हूँ वो कैसे हमारे देश की 70% आवादी कृषि पर  निर्भर है और आप को तो पता हे की किसान  खेती मौसम के अनुसार करता है जब तक खेतो में बुआई  कटाई  इत्यादि करने के बाद उसके पास अगर चार महीने काम है तो चार महीने वो खाली  रहता है यानी  बेरोजगार ,इस तरह कृषि  में भी कितने ही युवा बेरोजगारी की मार को झेलता है जिसकी बजह से कितने ही किसान काम ना होने की बजह से आत्महत्या कर लेता है ,

इस प्रकार हमारे देश में शिक्षीत बेरोजगारी के कई कारण हो सकते है परन्तु इनको ख़त्म करने की जिम्मेदारी हमारे देश की सरकार  को लेनी होगी और पछपात नीति को छोडकर ईमानदार को महत्व देना होगा तभी बेरोजगारी काफी हद तक ख़त्म हो सकती है ,
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समाप्त
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आशा करती हूँ शिक्षीत बेरोजगारी पर मेरा ये लेख आप को पसंद आए अगर मेरी वज़ह से किसी को भी कीसी प्रकार से   ठेस  पहुँची हो तो छमा चाहुँगी इसी आशा के सात धन्यवाद .....

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