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"सुंदरबन" भारत का स्वर्ग

दोस्तो मैं आपको बताने जा रहा हूं ऐसी बातें जो शायद लोग जानते हैं भारत का एक प्रसिद्ध वन जिसे लोग सुंदरबन के नाम से भी जानते हैं मैं आज आपको यह बताऊंगा कि सुंदरबन में ऐसी क्या खास बात है जिससे लोग उसे देखने के लिए बहुत ही उत्सुक रहते हैं और क्या उसमें ऐसे जानवर है जिनसे लोग बहुत ही भयभीत हुआ करते हैं

सुंदरवन:-यह एक ऐसा वन है जो पूरे विश्व के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है यहां पर बहुत अनेक वनस्पतियां पाए जाते हैं वैसे तो हमारे भारत देश में बहुत से ऐसे वन है जो बहुत ही वनस्पतियों से भरे हुए हैं लेकिन सुंदरवन को जन्नत माना जाता है क्योंकि इसकी सुंदरता इतनी ही अद्भुत है जितना कि इसके अंदर खतरनाक जानवर है यह भारत के बहुत ही डरावने जंगलों में से एक जंगल माना जाता है क्योंकि इस जंगल में जो रहते हैं

उनके खौफ से आकर्षित होकर पूरी दुनिया के लोग उसे देखने आते हैं और उसकी एक झलक पाने के लिए अपनी जान को जोखिम में डाल देते हैं सुंदरबन पश्चिम बंगाल में 10 किलोमीटर वर्ग सेंटीमीटर में फैला हुआ एक जंगल है सुंदरवन को मैंग्रोव फारेस्ट भी कहा जाता है सुंदरबन यह बहुत ही खूबसूरत है इसके अंदर इतने वनस्पतियां पाए जाते हैं

कि शायद ही कहीं पाए जाते हो और इसके अंदर वन्य जीव भी पाए जाते हैं यह बंगाल में स्थित है या इतना लंबा चौड़ा है कि इसे अगर हम ऊपर से देखें तो यह बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है उसकी खूबसूरती को देखने के लिए लोग भारत ही नहीं बहुत दूर-दूर से आते हैं सुंदरबन दक्षिण भारत में गंगा नदी के राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में है यह क्षेत्र मेंगरो के घने जंगलों से घिरा हुआ है और यहां पर रॉयल बंगाल टाइगर सबसे ज्यादा पाए जाते हैं सुंदरवन 1987 में वन्य जीव आरक्षित घोषित हुआ था और 4 मई 1984 को ऐसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था यहां बहुत से तादात में सुंदरी पर मिलते हैं उसके ऊपर ही इसका नाम सुंदरबन रखा गया है

इसके इलावा यहां पर ऐसे कई अन्य वृक्ष है जो सिर्फ यही पाए जाते हैं एक खास बात यह भी है यहां पर सिर्फ वही पेड़ पौधे बचे रह सकते हैं क्योंकि हर मीठे पानी मैं उगते हो सुंदरवन या एक मैंगो पॉइंट से घिरा हुआ है मतलब इस जंगल के चारों तरफ दलदल पाए जाते हैं और यह दलदल से चारों ओर से घिरा हुआ है मैंग्रोव पेड़ों की खासियत है इसकी जड़ हमेशा ऊपर निकल आती है इसीलिए इसे मैंग्रोव फारेस्ट भी कहा जाता है सुंदरवन विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है कबीरा और ब्रह्मपुत्र से मिलकर बने इस क्षेत्र को बंगाल डेल्टा या ग्रीन डेल्टा भी कहा जाता है

सुंदरबन डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा वह छोड़ा है लंबा डेल्टा है यह डेल्टा चावल का सबसे अच्छा उद्योग है और यहां पर झूठ का सबसे बड़ा औद्योगिकरण होता है सुंदरवन डेल्टा में भूमि का ढाल अत्यधिक कम होने के कारण यहां गंगा बहुत धीमी गति से बहती है और अपने साथ लाई भी मिट्टी को वह वही किनारे पर जमा कर देती है जिससे कि सुंदरवन और बड़ा होता जाता है कहते हैं कि सुंदरवन का इतिहास 200 से 300 वीं सदी का माना जाता है इसका प्रमाण बाघमारा शेष में मिले अवशेषों से मिलता है मुगल साम्राज्य के राजाओं ने जब इस वन को अपने शासक में लिया था तो उनसे चुकने के लिए कई लोग सुंदरवन के अंदर छुप जाया करते थे लेकिन अधिकतर अपराधी या मौजूद बाग़ का शिकार हो जाया करते थे 1757 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने सुंदरवन को मुगल साम्राज्य के राजा आलमगीर से ले लिए थे कोई भी अधिकार उसके बाद मुगल साम्राज्य के पास नहीं बचा था सुंदरवन का उसके बाद 1807 में अंग्रेजों ने बंगाल में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट बनाने के बाद सुंदरवन का संरक्षण किया सुंदरवन से होकर बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां कुछ इस तरह है गंगा ब्रह्मपुत्र मेघना और पदमा है सुंदरवन 10000 किलोमीटर में फैला हुआ है जिसमें से 6000 किलोमीटर वर्ग बांग्लादेश में आता है


सुंदरवन में से सिर्फ 4110 किलोमीटर वर्क ही भारत के हिस्से में आता है मैंने 2015 के आंकड़ों के मुताबिक सुंदरवन में 180 टाइगर हैं जिसमें से 106 बांग्लादेश की सीमा में है और 74 भारत की सीमा में आते हैं कहते हैं कि टाइगर के हमले से हर वर्ष 50 से अधिक लोग मारे जाते हैं दोस्तों क्या आप जानते हैं कि सुंदरबन में एक ऐसा गांव भी है जिसे विडो विलेज यानी विधवाओं का गांव भी कहा जाता है इसे विधवाओं का गांव इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां के लगभग बहुत से जवान पुरुष टाइगर के हमले में मारे गए हैं और यहां ज्यादातर विधवाएं ही पाई जाती है सुंदरवन रॉयल बंगाल टाइगर की धरती है जो की बहुत ही खतरनाक शिकारी है वह अपने शिकार को चुपके से झपटकर और बहुत ही तेजी से जंगल में ले जाते हैं यह बहुत ही आसानी से बड़ी बड़ी नदियां के पार कर लेते हैं और ऐसी बहुत सी घटनाएं भी देखी गई है जहां पर यह बाघ मच्छी पकड़ने वाले मछुआरों को नाव से ही खींच कर ले गए हैं और उनका कुछ पता नहीं लग पाता है सुंदरबन में विश्व के सबसे ज्यादा टाइगर रहते हैं इस लुप्त हो रही प्रजाति का संरक्षण अब सिर्फ सुंदरबन के ही हाथों में रह गया है

 सुंदरवन में स्तनधारियों की 50 से अधिक प्रजातियां निवास करती हैं रॉयल बंगाल टाइगर के साथ साथ  रेंगने वाले जानवरों की प्रजाति हैं और सुंदरबन में 300 से अधिक उड़ने वाले जानवर पक्षियों की प्रजातियां और 300 से अधिक वनस्पतियों की प्रजातियां पाई जाती है सुंदरबन किंग कोबरा और मगरमच्छ की घातक प्रजातियों का घर भी है सदाबहार रहने वाले सुंदरवन को वर्ल्ड हैरी अरेस्ट साइट में शामिल किया गया है जिसकी वजह से इसका संरक्षण काफी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है सुंदरवन के इस विशाल डेल्टा में 54 छोटे छोटे समूह हैं जिसे देखने का एकमात्र माध्यम नाव है क्योंकि यहां इंसान जंगल के रास्ते से नहीं जा सकता सुंदरवन में विश्व का सबसे अधिक बड़ा बोर्ड है इन सब बातों के अलावा सुंदरवन फोटोग्राफी की चाह रखने वालों के लिए स्वर्ग है

जिसे कहकर बयां नहीं किया जा सकता क्योंकि उसकी खूबसूरती इतनी लाजवाब है कि उसे कह कर बयां नहीं किया जा सकता सिर्फ देखकर ही बयां कर सकते हैं इसी कारण सुंदरवन के ऊपर बहुत सी डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बन चुकी है जिसके माध्यम से पूरे विश्व में सुंदर वन की झलक देखी है कहते हैं कि गुलाब का फूल होता तो बहुत खूबसूरत है लेकिन उसमें कांटे भी लगे होते हैं इसी तरह सुंदरवन भी बहुत खूबसूरत है लेकिन इसमें बहुत ही खतरनाक प्रजातियां भी है जो कि बहुत खतरनाक है सुंदरवन में रॉयल बंगाल टाइगर के साथ-साथ कई अन्य जीवो का खतरा भी रहता है जिसमें किंग कोबरा और कई विषैले सांप भी शामिल है जो यहां भारी मात्रा में पाए जाते हैं चाहे खतरा कितना भी हो फिर भी लोग दूर-दूर से सुंदरवन को देखने के लिए आते हैं और कई यात्री तो वोट पर कई कई दिन तक रहते हैं और बोर्ड के माध्यम से सुंदरवन के उस क्षेत्र में जाते हैं जहां सुंदरबन की आत्मा बसती है जहां पहुंचने के बाद उन्हें एक अलग ही दुनिया का एहसास होता है जहां उन्हें प्रकृति का एक असली रूप दिखाई देता है जहां उन्हें समय ठहरा हुआ प्रतीत होता है जहां ऐसा लगता है कि बस यहीं ठहर जाओ दोस्तों अगर आप एडवेंचरस के शौकीन हैं तो एक बार सुंदरवन जरूर जाएं पर ध्यान से यह बहुत ही खतरनाक जंगल भी है सुंदरबन जाने का सबसे अच्छा मौसम ठंड माना जाता है

धन्यवाद

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