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भारतीय महिला टीम के कप्तान मिताली राज की कहानी |

यदि खुद पर भरोसा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है, 

यह बात भारतीय महिला टीम के कप्तान मिताली राज ने हाल ही में एक दिवसीय क्रिकेट में सबसे अधिक रन के रिकॉर्ड को अपने नाम करने के बाद बताया।

उन से पहले या रिकॉर्ड इंग्लैंड के Charlet AdWords के नाम था।

मिताली ने यह कारनामा 183 वनडे मुकाबले में किया है, आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान वह वनडे क्रिकेट में 6000 रन बनाने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन गई है, आइए जानते हैं मिताली राज से उनके सफलता के टिप्स ....

खुद के निर्णय पर भरोसा किया
शुरुआती दौर में मिताली राज का सपना क्रिकेट खिलाड़ी बनने का नहीं था, वह बचपन से ही एक डांसर बनना चाहती थी, इसके लिए उन्होंने शास्त्रीय नृत्य भारतनाट्यम भी सीखा, इसके बाद जब वह महज 10 साल की थी तभी उनके माता-पिता को मिताली के शिक्षकों ने उन्हें क्रिकेट में भविष्य आजामाने की सलाह दी, माता पिता के साथ मिताली ने अपना निर्णय बदला और वह क्रिकेट के गुर सीख कर आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम का सितारा बन गई है ,

सफलता के लिए उम्र नहीं बाधा

डांस का प्रशिक्षण खत्म करने के बाद मिताली ने सिर्फ क्रिकेट के ऊंचे पायदान को छुआ, वह सिर्फ 16 साल की उम्र में महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू करने वाली खिलाड़ी बनी, इसके बाद उन्होंने 26 जून 1999 को आयरलैंड के खिलाफ अपना पहला शतक जमाया भारतीय क्रिकेट में महिला क्रिकेट में शतक जमाने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी थी उस समय में,

संघर्षों का सामना समझदारी से
क्रिकेट प्रशिक्षण लेते हुए मिताली को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा, उनकी मां लीला राज एक अस्पताल में काम करती थी, उनके पिता धीरज राज दौड़ाई बैंक में नौकरी करता था, स्वयं भी क्रिकेटर रहे हैं

उन्होंने मिताली को सबसे अधिक प्रोत्साहित किया,  मिताली की यात्रा का खर्च उठाने के लिए अपने खर्चों में कटौती करते थे, इसी तरह उनकी मां लीला राज को भी बेटी की सहायता के लिए अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी, इन सब संघर्षों के बाद भी मिताली ने हार नहीं मानी और आज वह बुलंदियों पर हैं।

खुद पर करें विश्वास और बेहतर आकलन करना सीखें
सफलता के रास्ते में तमाम तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ता है, पर उन सब से लड़ के जो आगे बढ़ता है, उनकी ही जिंदगी बन सकती है,

उस पर ध्यान देना चाहिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, उनके दिनचर्या में पहले कुछ खराबी था जिनमें मुख्य था उनका सुबह देर तक सोना, बाद में जब उन्होंने क्रिकेट प्रैक्टिस करना शुरू किया तो सुबह 5:00 बजे सोकर उठती है, और वह खाली समय में टाइम का महत्व समझ कर वह किताबें पढ़ना पसंद करती है,

वह इंसान अपने क्षेत्र से जुड़े किसी भी काम को दूसरों से अलग और बेहतर तरह से करता है, वह जल्द सफलता के लिए इंसान को कड़ी सोच और कड़ी मेहनत करना पड़ता है, अच्छे क्रिकेटर की मान्यता के लिए इंसान को विशेषज्ञों के सानिध्य में रहना चाहिए, आज्ञाकारी स्वभाव अनुभव और हमेशा नया करने की सोच इंसान के भीतर हर समय से कार्य करने की ललक जगाती है, यही ललक उसे दूसरों से अलग करती है।।
मिताली राज का संदेश युवाओं के लिए

भारतीय नेशनल गेम हॉकी महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज का कहना है कि मुश्किल हालातों में धैर्य ना खोना ही इंसान को की जीत का सबसे बड़ा संकेत होता है या आपको जीवन में आगे बढ़ने और सही समय पर सही निर्णय लेने में मदद करता है संघर्ष चाहे जीवन में हो या मैदान पर हमें अंतिम समय तक उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए और जमकर जीत के लिए हमें लड़ना चाहिए क्योंकि भाग्य भी बहादुरों का साथ देता है।।

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