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emergency क्या है और यह क्यों लगाई गई थी


सन 1975 की इमरजेंसी की घटनाओं का वर्णन इंटरनेट से जानकारी इकट्ठा करके बताया गया है इस आर्टिकल का उद्देश्य लोगों तक न्यूज़ एजेंसी की जानकारी पहुंचाना है यह जानकारी सिर्फ एजुकेशन पर्पस और लोगों की नॉलेज के लिए है
आज हम बात करने वाले हैं उस एमरजेंसी की जिसने 25 जून 1975 की आधी रात को देश की डेमोक्रेसी को डिक्टेटरशिप में तब्दील कर दिया था 26 जून 1975 से 23 मार्च 1977 तक इस समय में देश में क्या-क्या घटा आ गई उनकी बात करने जा रहे हैं इस बात का ज्यादातर भारतीयों को पता नहीं है लेकिन लोगों को यह मालूम होना चाहिए कि इमरजेंसी के समय क्या हुआ और क्यों हुआ

बात की शुरुआत होती है सन 1971 से जब श्रीमती इंदिरा गांधी उत्तर प्रदेश के रायबरेली क्षेत्र से लोकसभा सीट के लिए लड़ी और 182309 वोटों से जीती हारने वाली पार्टी के उम्मीदवार संयुक्त राज्य पार्टी के अध्यक्ष राज नारायण थे जो कि स्वतंत्रता सेनानी रह चुके हैं उन्होंने अपनी हार के बाद इंदिरा गांधी के इस चुनाव पर केस कर दिया उनका कहना यह था कि चुनाव के दौरान धोखाधड़ी की गई है कि जिससे मैं हारा हूं कभी कोई प्रधानमंत्री कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ था लेकिन इंदिरा गांधी 18 मार्च 1975 में कोर्ट में हाजिर हुई प्रधानमंत्री के ओदे को ध्यान में रखकर उनके बैठने का इंतजाम न्यायमूर्ति के मंच पर ही किया गया था लेकिन उनकी कुर्सी न्यायमूर्ति की कुर्सी से थोड़ी सी नीचे रखी गई थी क्योंकि प्रजातंत्र में संसद और न्यायपालिका कभी भी एक बराबर नहीं होती इस घटना से यह साबित हो गया था कि जस्टिस सीना किसी भी पक्षपात के बिना अपना फैसला सुनाने वाले थे उसके बाद उनके कहे मुताबिक उनको खरीदने के कई कोशिश किए गए लेकिन वह सब असफल रहे कुछ दिन तक कार्रवाई चलती है उसके बाद पता चला कि जस्टिस सीना ने मैसेज गांधी को उनके पद से हटा दिया है ऑर्डर के पेपर इंदिरा गांधी तक पहुंचाए गए इस बात से सरकार में बखेड़ा शुरू हो गया था प्रधानमंत्री के चेहरे पर गम था
 जब उनके बेटे उनके साथ थे राजीव गांधी और छोटे बेटे संजय गांधी गुड़गांव में Maruti कंपनी को चला रहे थे जो वहां से घर आ रहे थे घर आकर उन्होंने देखा कि लोगों की भीड़ जमा थी उस समय पायलट राजीव गांधी को राजनीति में कोई खास रुचि नहीं थी लेकिन छोटे बेटे संजय गांधी को जितनी रुचि राजनीति में थी
उतना तो उन्हें शायद अपने Maruti प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के काम में भी ना थी संजय गांधी एक फायर माइंडेड आदमी थे और वह अपनी माता को विरोधियों से बचाकर रखना चाहते थे जब लेटर उन्हें मिला उसके बाद उनके पास त्यागपत्र देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था पर संजय गांधी ने उन्हें त्यागपत्र देने से मना कर दिया उन्हें लगता था कि इंदिरा गांधी को विरोधियों से ज्यादा अपने ही कांग्रेस के कुछ सत्ता के लालचियों से खतरा है जोकि हरी हुई प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की कुर्सी पर बैठना चाहते थे इस राजनीति की आपत्ति से इंदिरा गांधी को अब कोई नहीं बचा सकता था एक चीज के जोशी धारा 352 साफ साफ शब्दों में कहें तो इमरजेंसी आओ चलो आज मैं तुम्हें बताता हूं के emergency  अधीन क्या-क्या होता है
नंबर 1 भारत अथवा उसके वास्तविक रूप को विदेशी हमलावरों या आंतरिक बगावत खोरो से संकट हो तो देश के राष्ट्रपति इमरजेंसी घोषित कर सकते हैं नंबर दो इमरजेंसी के दौरान केंद्र सरकार राज्य सरकार के ऊपर अपना शासन चला सकती है नंबर 3 धारा 19 के दौरान भारतीय को दिए गए मूलभूत अधिकार सारे इमरजेंसी के दौरान सारे वर्जित यारी बंद कर दिए जाते हैं नंबर 4 व्यक्ति को व्यापार की स्वतंत्रता बोलने की स्वतंत्रता बाहर घूमने की स्वतंत्रता और समाचार की स्वतंत्रता सब बंद कर दी जाती है उस रात इंदिरा गांधी और संजय गांधी की बातचीत के बाद पूरा प्लान तैयार कर लिया गया था बस इस इमरजेंसी को लागू करने के लिए इंदिरा गांधी को एक बहाने की जरूरत थी और वह बहाना भी उन्हें मिल गया 23 जून 1975 के दिन विरोध पक्ष के नेताओं ने जयप्रकाश इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन करने के लिए खड़ा किया था और जयप्रकाश नारायण ने यह जिम्मेदारी उठा ली थी हाईकोर्ट के फैसले के बाद अगर इंदिरा गांधी अपने पद से इस्तीफा नहीं देती तो वह लोकतंत्र का विरोध माना जाता और इसके खिलाफ जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली में एक रैली का आयोजन किया जिसमें लाखों लोग उनके साथ शामिल हुए जयप्रकाश नारायण एक बहुत ही सूक्ष्म और नेतृत्व में निपुण व्यक्ति थे उन्होंने ना सिर्फ लोगों को बल्कि मिलिट्री और पुलिस को भी नेताओं के गैरकानूनी फरमान ना मानने के लिए कहा था और श्रीमती इंदिरा गांधी के लिए धारा 302 लागू करने के लिए इससे अच्छा मौका और कोई नहीं था रातों-रात इमरजेंसी की घोषणा के लिए सिद्धार्थ रॉय राष्ट्रपति के दफ्तर पहुंचे बाद में इंदिरा गांधी और आर के दमन भी वहां पहुंचे राष्ट्रपति ने जिस कागज पर हस्ताक्षर किए थे उन पर यह लिखा था


"In exercise of the powers conferred by clause (1) of Article 352 of the Constitution, I, Fakhruddin Ali Ahmed, 
President of India
, by this Proclamation declare that a grave emergency exists whereby the security of India is threatened by internal disturbance."

आज के दौर में जब पत्रकार उस घटना का मुआयना करते हैं तो वह कहते हैं उस समय पर बाहरी तथा आंतरिक कोई खतरा नहीं था हालात चाहे कुछ भी हो लेकिन इतना था कि हमारे ऊपर इमरजेंसी को थोपा गया था और सुबह ऑल इंडिया रेडियो पर श्रीमती गांधी का यह बयान था
राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है और यह सब आप के लिए ही किया जा रहा है कृपया संयम बनाए रखें इमरजेंसी के दौरान बहुत से लोगों को गिरफ्तार किया गया जिसमें यह लोग भी शामिल थे
नंबर 1 अरुण जेटली नंबर दो अटल बिहारी वाजपेई नंबर 3 एल के आडवाणी मीडिया टीम के संवाददाता रजत शर्मा और इन सबके साथ कुछ विरोधी नेता भी शामिल थे इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी सबसे ताकतवर महिला के रूप में सामने आई वह एक कद्दावर नेता थी इमरजेंसी की वजह से हमारे देश में काफी अफरा-तफरी हो गई थी लेकिन इमरजेंसी की वजह से हमारे देश के बहुत से गद्दार विनीता और कई विरोधियों को भी पकड़ा गया था इमरजेंसी हमारे देश पर जहां एक परेशानी थी वहीं एक हमारे देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण और सफल प्रयास साबित हुआ इमरजेंसी के बाद जब लोगों ने उस चीज को परखा और समझा तो लोगों को कहीं ना कहीं यह लगा कि इंदिरा गांधी का यह फैसला बहुत ही सफल और अच्छा था


तो दोस्तों आज के लिए बस इतना ही अगर आपको कुछ और जानकारी चाहिए या किसी और चीज के ऊपर आर्टिकल चाहिए तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं यह सब आर्टिकल हम आपकी नॉलेज बढ़ाने तथा आपको अच्छा ज्ञान देने के लिए करते हैं आप भी इसमें हमारा पूर्ण सहयोग करें और इस को दूसरों तक पहुंचाने का प्रयास करें और हमारे इस आर्टिकल के बारे में हमें बताएं कि आपको कितना अच्छा लगा या इसमें क्या गलत है

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